बुराई, अनाचार, अधर्म, अज्ञानता आदि सभी ऐसे भाव हैं जिन्हें कोई व्यक्ति अपने आसपास नहीं फ़टकने देना चाहता। परन्तु फ़िर भी इनका समावेश प्रत्येक व्यक्ति में है!! हर कोई इनका नामोनिशान मिटा देना चाहता है, परन्तु आजतक सफ़ल कोई न हो सका, और वह दिन बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण होगा जिस दिन इनका नाश हो जाएगा!!
क्यों? क्या आश्चर्य हो रहा है कि मैं अब धर्म की आलोचना के बाद बुराई की वकालत क्यों कर रहा हूँ? नहीं, मैं शैतान या इबलीस का उपासक नहीं बन गया हूँ। इस वकालत के पीछे भी एक कारण है, बहुत गूढ़ कारण है, और दुर्भाग्यवश बहुत से लोगों को इसका ज्ञान नहीं है।
Name:
VIPPER2006-04-19 13:56
MOONSPEeK
Name:
VIPPER2006-04-19 15:52 (sage)
I must learn sanskrit.
Name:
VIPPER2006-04-19 17:18
Is this jew talk?
Name:
VIPPER2006-04-19 17:33
now where the hell is that
Name:
VIPPER2006-04-19 18:36
>>5
Go out and look to the sky. See a glowing white disc?
पहली बात तो यह कि “शैतान” या “इबलीस” क्या है? यह बुराई का प्रतीक है, आम भाषा में कहा जाए तो यह सभी बुरे कर्म करने वालों का स्वामी है, ईश्वर का प्रतिद्वन्द्वी है, उसकी विपरीत शक्ति है। जिस तरह ईश्वर के उपासक सद्कर्मों में अपना समय लगाते हैं, वहीं शैतान के उपासक बुरे कर्मों में अपना समय और ऊर्जा व्यतीत करते हैं।
पर क्या कभी सोचा है कि यह शैतान कहाँ से आया? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? कई विद्वानों का मानना है कि इसकी उत्पत्ति नहीं हुई, यह भी ईश्वर की तरह ही अनश्वर और अनंत है, तो कुछ अन्य विद्वानों का मानना है कि ईश्वर ने ही शैतान की उत्पत्ति की थी। हिन्दु पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि सुर और असुर एक ही पिता की सन्तानें थीं, जो सदाचार की ओर मुड़ गए वे सुर(देवता) कहलाए, जिन्होंने अनाचार को अपना लिया वे असुर कहलाए।
Name:
VIPPER2006-04-20 10:15
durka durka durka?
Name:
VIPPER2006-04-20 10:21 (sage)
See >>3.141592653589793238462643383279502884197169399375105820974944592307816406286208998628034825342 for the answer.